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गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में और इसके बाद सà¥à¤¤à¤¨à¤¦à¥‚ध कैसे बनता है
माठका दूध शिशॠके लिठपà¥à¤°à¤•ृति का सबसे बेहतरीन आहार है। दूसरी तिमाही में आपकी दà¥à¤—à¥à¤§ गà¥à¤°à¤‚थिया पूरी तरह तैयार हो जाती है, ताकि अगर शिशॠका जनà¥à¤® समय से पहले हो जाठतो à¤à¥€ आप उसे सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने के लिठतैयार हों। माठके दूध की सबसे खास बात यह है कि शिशॠकी जरà¥à¤°à¤¤ के हिसाब से इसमें बदलाव आता रहता है। यह अतà¥à¤¯à¤‚त वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त आहार होता है और शिशॠके वजन और उसकी à¤à¥‚ख के आधार पर सà¥à¤¤à¤¨ दूध के उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ की मातà¥à¤°à¤¾ à¤à¥€ बढ़ती रहती है।
यह गाढ़ा, मलाई जैसा दिखने वाला दूध होता है, जिसमें पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ और वसीय ततà¥à¤µ कम होंगे। आपके शिशॠके जनà¥à¤® के बाद पहले तीन दिनों तक उसे केवल इस कोलोसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤® की ही जरà¥à¤°à¤¤ होती है। आपके शिशॠका पेट बहà¥à¤¤ छोटा होता है, इसलिठउसे शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में केवली थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में ही दूध चाहिठहोता है।
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